कौन है जिसकी यादों ने सोने न दिया
आँखे नम हैं फिर भी रोने न दिया
चिन्गारी सी थी दिल में जो अब आग बन गयी
तेरे न होने से सबनम भी शबाब बन गयी
बेवजह हूँ जो तेरे यादों खोया रहता हूँ
दिन रात बस एक ही ज़ख्म को सहता हूँ
शायद मुरझाया है वो फूल जो खिला था तेरे होने से
क्यूँ फर्क नहीं पड़ता तुझे मेरे रोने से
बेफ़िक्र है तू उन सवालों से भी
चुभता है जो मेरे दिल में काँटों की तरह
आखिर क्या थी मुझसे दूर होने की वजह।
-विवेक श्रीवास्तव ☺

Social Plugin