बचपन

यादें  बचपन की 

हाँ वो बचपन था बचपन का मज़ा तो बच्चों में ही आता था 
किसी से मोह्हबत नहीं थी पर आसमान को निहारता था 
तारों का पीछा करते हुए सपनों की दुनिया में जाता था 
और लम्बी कहानियों ने अपने को कुछ ऐसा पता था 
जैसे मैं ही हीरो होता ,मैं ही सब कराता था 
हाँ वो बचपन था बचपन का मज़ा तो बच्चों में ही आता था 

जुगुनवों को डिब्बों में भर चाँद तारों को चिढ़ाता था 
ठण्डी गर्मी बरसात खेलता रहता सब सह पता था 
पिल्लों को साथ लेकर सोता उनका मशीहा बन जाता था 
कागज की चरखी को पंखो से तेज नाचता था 
हाँ वो बचपन था बचपन का मज़ा तो बच्चों में ही आता था 

कंचि गोलियों के लिए लड़ कर दोस्तों का कब दुसमन तो कब जिगरी यार बन जाता था 
मम्मी के बुलाने पर कहीं कोनों में  छुप जाता था 
स्कूल न जाने का बहाना कर बीमारी को खुद ही बुलाता था 
समय निकल जाने पर बिना दवा ही ठीक हो जाता था 
हाँ वो बचपन था बचपन का मज़ा तो बच्चों में ही आता था 

अब कैसे लाऊँ वो बचपन जिसे कहीं दूर छोड़ आया हूँ 
अब तो उसे किसी के बचपन में ही पाता हूँ 
कि वो बचपन था 
बचपन का मज़ा तो बचपन में ही आता था। 

                                              -विवेक श्रीवास्तव ☺

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