सोचता हूँ मांग लू ईश्वर से तुमको प्रियतमा
सोचता हूँ बस जाऊँ मांग में तुम्हारी प्रियतमा
अभिलाषा और भी है व्यक्त करूँ क्या प्रियतमा
मांग लो ईश्वर से जीवन का तुम्हारे पुण्य हो
मांग में बसूं तुम्हारी बिखर कर मैं प्रियतमा
विश्व की धरोहर सी हो सूर्य का वह तेज हो
जिसको पाने की तमन्ना बढ़ गयी अब प्रियतमा
मुक्त कर दो व्यक्त कर दो प्रेम के उस भाव को
जिसको पाने की आरज़ू रह गयी एह्साह को
दूर हो या पास हो बस यही एहसास हो
इस कदर बस जाओ मुझमे तुम मेरी वो प्रियतमा
स्वाती की वह बूँद हो बृष्टि की बौछार हो
नव पल्लव की सुकुमारी सी तुम कामिनी का प्यार हो
जिसकी खुसबू से सुगन्धित हो चूका मैं प्रियतमा।
-विवेक श्रीवास्तव ☺

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