छोड़ दिया प्यार का नशा हमने उनके कहने से
मुश्किलें थी काफी उनको मेरे रहने से
खुश तो बहुत हैं इस बात का इत्तफ़ाक हम भी रखते है
पर ये भी सच है कि वो याद बहुत करते हैं
इस बात की गवाही मेरी हिचकियाँ देती हैं तेरा नाम लेने से
डर आज भी उनको क्यू है मेरा साथ खोने से
भूलना इतना आसान ही होता तो कर गए होते कब के
क्यू नहीं निकाल पा रहे आज भी मुझे अपने दिल से
खुशियाँ आज भी हैं पर वो दुगनी थी तेरे होने से
क्या कर सकता हूँ उन्हें हासिल तेरे यादों तेरे ख्वाबों से ?
चले आओ पहले की तरह बहार बनकर मेरी बागों में
ज़िन्दगी दूर सी हो रही तेरे न होने से।
-विवेक ☺

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