Barish Ki Ashliyat

barish ki ashliyat
नशे में मैं था बारिश भी हो रही थी 
मेरे अकेलेपन की तारीफ भी हो रही थी 
वो तन्हाई में भीग रहे होंगे तो थोड़ा तो मुश्किल होगा 
पर क्या करे ,इसमें उनका कुछ तो हाँसिल होगा 
हाँ ये भी सच है कि मौसम को इंतजार है तेरे मेरे साथ का 
शायद बारिश को भी एहसास है तेरे उस भीगे प्यार का 
तभी निकल जाती है शहर के ऊपर से चिड़ा कर मुझे 
नहीं बरसूँगी रिझा कर तुझे 
अब तो शिकायत हो गयी है शहर वालों को मुझसे 
क्यों नहीं मिलता  है तू जाकर उससे 
नाकारा है तू ,बेवफ़ा भी है 
तेरे जैसे के लिए यही सजा है
आ जा नहीं सब जान जायेंगे 
बारिश की असलियत को पहचान जायेंगे 
की मौसम नहीं ,वो आंसुओ की बौछार थी 
तू मिलने को मुझसे कितना बेक़रार थी। 
                                          -विवेक श्रीवास्तव ☺

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